4 प्रश्न जो आपके बच्चों का भविष्य बदल देंगे


जैसे ही बच्चों की परीक्षा खत्म होती है और रिज़ल्ट आता है, वैसे ही अभिभावकों की एक और गतिविधि शुरू हो जाती है| आप सब भी यकीनन अपने बच्चों के लिए नए-नए यूनिफ़ोर्म, बैग, जूते, कॉपी-किताब, सॉक्स और ऐसे ही कई चीज़ें लेने में व्यस्त होंगे|



कुछ माता-पिता अपने बच्चों को समर कैंप भेजने की योजना बनाने में व्यस्त हो जाएंगे| वो यह तय करने में लग जाएंगे कि अपने बच्चों को इन गर्मी की छुट्टियों के दौरान किस कोर्स में एडमिशन दिलवाएं या किन क्लासेस में भेजे| महिलाएं एक-दूसरे से फोन पर यह जानने में व्यस्त होंगी कि किस समर कैंप में किसके बच्चे जा रहे हैं|



अधिकांश घरों की वही कहानी होती है, जहां माता-पिता अपने बच्चो की परवरिश में वही सवाल दोहराते हैं|


बच्चों के स्कूल से आने पर मां पक्का पूछती हैं:

  • क्या पूरा खाना खाया?
  • आज टेस्ट कैसा हुआ?
  • कितने नंबर आएंगे?
  • मेम ने क्या कहा?
  • क्या उन्होंने डायरी में कोई नोट लिखा?


यदि आप पिता हैं तो क्या आप हर शनिवार-रविवार अपने बच्चों से पूछते हैं:

  • कहाँ घूमने जाना है?
  • कौन से मॉल चलना है?
  • कौन सी पिक्चर देखनी है?
  • कहाँ खाना खाने चलें?


बच्चों के साथ करने वाली आपकी गतिविधि में इतना दोहराव है कि आप खाना भी वहीं सब ऑर्डर करते हैं| शायद आपके ऑर्डर में पनीर बटर मसाला, दाल फ्राय और जीरा राइस होता है| अगर ऐसा है तो आप एक पिता के रूप में केवल चीज़ें दिलाने और मां के रूप में केवल सवाल करने तक सीमित रह जाएंगे|



आप अपने बच्चों का जीवन बदलना चाहते हैं और उनका एक बेहतर भविष्य गढ़ने के लिए प्रयासशील हैं तो आवश्यक है कि आप अपने प्रश्नों में तब्दीली लाएं


आज से बच्चों के प्रति अपने व्यवहार और सवालों में कुछ बदलाव लाएं|

पहला प्रश्न: आपने क्या आज किसी की मदद की, कुछ ऐसा किया जिससे किसी का काम हल्का हुआ हो?

संभव है कि आपके बच्चों में दया का भाव पैदा हो और वह किसी कि भी मदद करने को सदैव तत्पर रहने लगें|

दूसरा प्रश्न: · क्या आज आपने किसी बच्चे के साथ खाना खाया और उन्हें अपने खाने में से हिस्सा दिया? 

आप उन्हें यह मत सिखाएं कि यदि आपका खाना दूसरे खा लेंगे तो आप क्या खाओगे। संभवतःआपके बच्चों में मिल-बाँट के रहने और दूसरों को देने की आदत आ जाएगी|



तीसरा प्रश्न: · आज आपने क्या नया सीखा?

आपके बच्चों के जवाब में शायद आपको यह जानने को मिले कि उसकी कक्षा में कोई सहपाठी जो हर बात का उत्तर देता हो, उसे बेहद पसंद है| आपके बच्चे शायद किसी ऐसे बच्चे का नाम लें जो खेल-कूद में अच्छा हो| जब आप उनसे यह पूछेंगे कि क्या सीखने को मिला तो उनकी दूसरों में अच्छाई देखने की क्षमता विकसित होगी| संभव है कि इससे आपके बच्चे शायद हर व्यक्ति और हर स्थिति में अच्छाई देखने लग जाएं|


चौथा प्रश्न: · क्या पिछली बार कि तुलना से, इस बार अच्छा हुआ?

आप बच्चों से यह मत पूछिए कि आप पहले स्थान पर क्यों नहीं आए या आपके नंबर कम क्यों आए| यदि किसी बच्चे को १०० प्रतिशत मिलें तो आपको ९९ प्रतिशत क्यों मिले, इतना सिखाने के बाद भी नंबर क्यों कट गए|


आपको उनसे यह पूछना होगा कि क्या पिछली बार की तुलना में उनमें कोई सुधार हुआ है| आप यदि उनकी तुलना दूसरों से करेंगे तो मुमकिन हैं वो भी आपकी तुलना किसी अन्य अभिभावक से करने लगें| ऐसी स्थिति में गड़बड़ी पैदा हो सकती है, हो सकता है वह ये कहें कि उसके दोस्त के पिता के पास जो गाड़ी है वह आपके पास नहीं है| इसलिए आप यदि इस तरह की तुलना करते हैं तो आप तुरंत बंद कीजिए|


हर बच्चा अद्वितीय है, उसमें अपनी कुछ खासियत है इसलिए आप उनकी तुलना उन्हीं से कीजिए ना की किसी दूसरे से| आप अपने प्रश्न बदलेंगे और देखेंगे कि उत्तर खुद ही बदल जाएंगे| अपने बच्चों के प्रति व्यवहार में परिवर्तन लाएं फिर आपको उनमें संस्कार डालने का अतिरिक्त प्रयास और चिंता नहीं करनी पड़ेगी| आपके बच्चे स्वयं ही संस्कारवान हो जाएंगे|


आज से अपने बच्चों को स्कूल से आने पर उन्हें कस के गले लगाये क्योंकि साइंस भी यही मानता है कि माता-पिता का आलिंगन बच्चों को बहुत शांति देता है और इससे उनकी तरक्की होती है| आज ही से अपने पालन-पोषण का तरीका बदल दीजिए और अपने बच्चों का सुनहरा भविष्य सुनिश्चित कीजिए|


Dr Ujjwal Patni
Top Business Coach and Motivational Speaker